Ashoka Vijaya Dashami-Dhammachakra Pravartan, Oct’12

A grand program was organised at Ajanta Buddha Vihar on 24th October.

Ven. Gautam Ratna Thero presided over the function.

Chief Guest- Smt. Varshatai Gaikwad, Hon’ble Minister, Maharashtra Cabinet.

An Introduction to Ashoka Vijaya Dashami-

अशोका विजयादशमी का पर्व 2300 वर्ष पुराना बौद्ध संस्कृति का पर्व है. इसकी शुरुआत सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्मं की शरण ग्रहण करने से हुए थी. कलिंग के युद्ध के बाद जब सम्राट अशोक ने देखा की बड़ा रक्त-पात हुआ है, लाखों लोग मारे गए है, चारों तरफ हा-हाकार मचा हुआ है, पति की मृत्यु के बाद विलाप करती हुए महिलाये, पुत्र की मृत्यु पर शोकाकुल माताओ और पितृ विहीन बच्चों के दुःख की वेदनाओ को देखकर सम्राट अशोक का मन दुःख हो गया. राज्य की विशाल सीमाए उन्हें शांति नहीं दे सकी. इसी समय बाल भिक्खु निग्रोध की भेट सम्राट अशोक से हुए जिसने सम्राट अशोक को बौद्ध धम्म और उसकी जीवन में उपयोगिता के बारे में बताया. इसके बाद भिक्खु भदंत मोगली तिस्स द्वारा सम्राट अशोक को बौद्ध धम्म की दीक्षा दी गई.

वह दिन दशवी का था. उस दिन सम्राट ने घोषणा की, आज के बाद मै कोई युद्ध नहीं करूंगा तथा अपनी सारी शक्ति- धन – धान्य का उपयोग जनता की भलाई के लिए करूंगा…सम्राट ने कहा की अभी तक मैंने बाह्य युद्ध जीते थे लेकिन अब मैंने अंतःकरण को जीत लिया है. धम्म की शरण में आने के बाद मै निर्भय हूँ. निर्लोभ हूँ, मेरे मन में किसी लाभ की कोई अभिलाषा नहीं है. अतः आज के दिन को अतःकरण पर विजय के रूप में मनाया जाये. उसी समय से इस दिन को अशोका विजयदशवी के रूप में मनाया जाता है. सैकड़ो वर्षो तक यह पर्व इसी रूप में मनाया जाता रहा. भारत से बौद्ध धम्म लुप्त हो जाने पर हम सभी इसे भूल गए और अनजाने में इस पर्व को किसी और रूप में मानाने लगे. लेकिन परम श्रद्धेय बाबासाहेब डॉ आंबेडकर ने पुनः हमें अपनी संस्कृति का बोध करवाया. बाबासाहेब ने भी अपने संकल्प को पूरा करने के लिए अशोका विजयदशवी के दिन ही October14, 1956 को नागपुर में अपने 5 लाख से अधिक अनुययियो के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा लेकर पुनः भारत को बौद्ध्मय बनाने का मार्ग प्रसस्त किया. बाबासाहेब के अनुयायी और बौद्ध संस्कृति के लोग इस दिन दीक्षा भूमि, नागपुर आयोजन में शामिल होने जाते है.

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